बढ़ता कोरोना, जमात की भागीदारी - रामजी दौदेरिया
शीर्षक - बढ़ता कोरोना और जमात की भागीदारी
कवि - रामजी दौदेरिया
कानून की जंजीरों क्यों जकड़ा नहीं गया?
मरकज़ से फैलाया कोरोना जिस ने सारे देश में।
छुपा बैठा किसी कोने में किसी वेश में।
प्रशासन देश के गद्दारों को दे सख़्त संदेश।
पकड़ मौलाना को जल्द , भाग ना जाए वो विदेश।
इस ने और इस के जमातियों ने।
मरकज़ की इन जातियों ने।
हम देश के गद्दार हैं खुद बताया।
थूक - थूक कर कोरोना इन्होंने फैलाया।
देश में बढ़ा दिए कोरोना मरीज़।
बो रहे देश में ये नफ़रत के बीज।
अगर सारे जमाती जल्द पकड़े ना पाएंगे।
कोरोना के मरीज़ देश में और बढ़ जाएंगे।
अब तक तो लॉकडाउन भी खुल जाता।
एक-एक जमाती अगर पकड़ जाता।
कुछ नेता क्यों जमातियों पर बोल नहीं रहे?
लगता है उन के हितैषी हैं, राज़ खोल नहीं रहे?
जमातियों को खुद आ कर जाँच करवानी चाहिए।
सच्चे देश भक्त मुसलमानों को उन से अपील करनी चाहिए।
आगे आए अपनी ज़िम्मेदारी निभाए।
देश हित में जाँच करवाए।
नुकसान कर रहे कोरोना और जमात।
राष्ट्र को क्षति पहुँचा रहे दिन रात।
बढ़ता कोरोना जमात की भागीदारी।
क्या यही हैं इनकी समझदारी?
- रामजी दौदेरिया


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