माता प्रसाद पुस्तकालय
जहां आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया और मोबाइल के कारण किताबों से दूरी बढ़ती जा रही है, वहीं इसी दौर में पत्रकार सौरभ द्विवेदी ने अपने पैतृक गांव चमारी (जालौन, उत्तर प्रदेश) में एक प्रेरणादायक काम किया है। उन्होंने अपने गांव में एक आधुनिक पुस्तकालय बनवाकर यह साबित किया है कि ज्ञान की असली ताकत अब भी किताबों में ही बसती है। सौरभ द्विवेदी हिंदी पत्रकारिता के एक जाने-माने नाम हैं। सरल भाषा, गहरी समझ और बेबाक शैली के कारण उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में अलग पहचान बनाई। उन्होंने लंबे समय तक India Today Group का लोकप्रिय डिजिटल मंच द लल्लनटॉप का संपादन किया और अपने कार्यक्रमों के माध्यम से राजनीति, समाज और इतिहास जैसे विषयों को आम लोगों तक सरल भाषा में पहुँचाया। लेकिन उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। अपने इसी जुड़ाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने ने अपने गांव चमारी में “माताप्रसाद द्विवेदी पुस्तकालय” का निर्माण कराया। यह पुस्तकालय उनके दादा श्री माताप्रसाद द्विवेदी की स्मृति में बनाया गया है। लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से बने इस भव्य पुस्तकालय का उद्देश्य गांव और...