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सोशल मीडिया की ताकत से खड़ा हुआ आंदोलन।

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एक शख्स, सोशल मीडिया, और खड़ा हो गया बड़ा जन आंदोलन। झारखंड, जिला रामगढ़ के बूढ़ाखाप क्षेत्र में स्थित आलोक स्टील प्लांट पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। यह प्लांट स्टील और स्पंज आयरन उत्पादन से जुड़ा औद्योगिक इकाई है, जो क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास का एक स्रोत माना जाता है।  2004 से यह प्लांट चल रहा है लेकिन  विवाद तब ज्यादा बढ़ गया जब प्लांट के विस्तार की चर्चा शुरू हुई और सोशल मीडिया पर एक स्थानीय व्यक्ति सुरेंद्र महतो का विडियो वायरल हुआ, जिससे स्थानीय आंदोलन का कारण बना और यह मुद्दा अधिक चर्चा में आया है, स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्पादन प्रक्रिया के दौरान धूल, राख और विभिन्न गैसें निकलती हैं। इनमें सूक्ष्म कण, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें शामिल हो सकती हैं।  इससे खेतों पर राख जमती है, हवा में धूल बढ़ती है और सांस लेने में परेशानी महसूस होती है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण का असर खेती, पानी और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लंबे समय तक धूल और प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से अस्थमा, खा...

तमसा नदी का पुनर्जीवन जन आंदोलन। रामजी दौदेरिया

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जहां सरकारी योजनाएं दम तोड़ती हुई नज़र आती है, वहीं आम नागरिक कोई योजना शुरू करते हैं तो उसे अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लेते हैं। ऐसी ही एक योजना शुरू हुई तमसा नदी को साफ करने की और देखते ही देखते यह योजना एक बड़ा जन आंदोलन बन गई।  “ तमसा ” गंगा नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है। जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के मुख्य रूप से आजमगढ़, अम्बेडकर नगर, अयोध्या जिलों से होकर गुजरती है और आगे जाकर गंगा नदी में मिल जाती है। तमसा नदी सिर्फ एक साधारण नदी नहीं है, इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम वनवास पर अयोध्या से निकले थे, तो उन्होंने पहली रात तमसा नदी के किनारे बिताई थी। इसलिए यह नदी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। पहले यह नदी साफ, चौड़ी और जल से भरपूर थी और आसपास के गांवों की जीवनरेखा मानी जाती थी। लेकिन समय के साथ-साथ कई कारणों से नदी की हालत खराब हो गई नदी में सिल्ट (मिट्टी) जमा होने लगी बारिश के बाद मिट्टी जमा होती गई और नदी उथली हो गई। लोगों ने नदी किनारे निर्माण शुरू कर दिया जिससे अतिक्रमण बढ़ा। गांव और कस्बों का कचरा नदी में ज...

आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रूप से शिव क्या है? रामजी दौदेरिया

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शिव को आध्यात्मिक, दार्शनिक, प्रकृति, ऊर्जा, संतुलन और आत्मज्ञान का प्रतीक माना जाता हैं। शिव को संहार और परिवर्तन का देवता कहा जाता है। शिव वह परम चेतना या ब्रह्मांड की ऊर्जा हैं, जो हर जगह मौजूद है। योग और ध्यान में शिव को आदियोगी कहा जाता है, यानी योग के प्रथम गुरु। शिव केवल सृष्टि के विनाशक नहीं, बल्कि पुराने को समाप्त करके नए सृष्टि के कर्ता है। आध्यात्मिक दृष्टि से शिव का अर्थ “शून्य” है, यानी वह अवस्था जहां अहंकार, इच्छा और भ्रम समाप्त हो जाते हैं। जब मन शांत और स्थिर हो जाता है, उसे शिव की अवस्था कहा जाता है। आज भी विज्ञान मानता है कि शिव (शून्य) की अवस्था में ओम् की ध्वनि के साथ ध्यान (Meditation) करने से तनाव कम होता है, दिमाग शांत रहता है और सोचने की शक्ति बढ़ती है। मन पूरी तरह शांत, अहंकार रहित और सत्य तथा ज्ञान से जागरूक हो जाता है। इसी जागरूकता की अवस्था को शिव की तीसरी आंख का प्रतीक माना जाता है। यानि जब व्यक्ति अज्ञान और भ्रम से ऊपर उठता है, तब उसकी “तीसरी आंख” खुली मानी जाती है। विज्ञान कहता है कि पूरा ब्रह्मांड ऊर्जा और कंपन (vibration) से बना है। शिव को उसी अनंत ऊर्...

14 फरवरी काला दिन। रामजी दौदेरिया

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आज का दिन भारत के इतिहास का काला दिन है। लेकिन बहुत ही दुःख की बात है कि 14 फरवरी को लोग वैलेंटाइनडे के रूप में याद रहते है, और शहीदों का बलिदान भूल जाते हैं। 14 फरवरी 2019 भारत के इतिहास का वो काला दिन जिस दिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF जवानों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ। 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए। आज हम उन शहीदों को नमन करते हैं, जिनकी वजह से हम सुरक्षित हैं। उनका साहस, त्याग और देशभक्ति हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी।  इस देश में 14 फरवरी एक काला दिन हो उसी देश के युवा जवानों के बलिदान को भुला कर, वैलेंटाइन डे के रूप में इस दिन का जश्न मनाते हो, उस देश के युवाओं से देशभक्ति राष्ट्रवाद, राष्ट्र सर्वोपरि की भावना की उम्मीद रखना बेईमानी होगी। वीर जवानों को मेरा कोटि-कोटि नमन विनम्र श्रद्धांजलि 🙏 ✍️ रामजी दौदेरिया          लेखक कवि 

राघव चड्ढा राजनीति की नई मिसाल। रामजी दौदेरिया

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आज की वर्तमान राजनीति में जहां नेताओं द्बारा संसद में सिर्फ हंगामा होता है, समय बर्बाद किया जाता है और आम आदमी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भटकाया जाता है। आज जहां नेता अपनी राजनीतिक फायदे के लिए बेवजह के मुद्दे उछालते हैं। वहीं आज एक नेता ऐसा भी है जो आम आदमी की ढाल बन कर खड़ा है, और आम आदमी के मुद्दों को उठाता है। मैं बात कर रहा हूं राघव चड्ढा की। राघव चड्ढा राजनीति से ऊपर उठकर, पार्टीयों से ऊपर उठकर सच्चे देश भक्त की तरह सिर्फ देश के बारे में सोचते है। अगर हर नेता राघव चड्ढा की तरह हो जाएं तो राष्ट्र विकसित और विश्वगुरु भी बन जाएगा, बाकी आज के लॉलीपॉप देने वाले नेताओं से जनता कोई उम्मीद नहीं रखती।  — रामजी दौदेरिया        लेखक कवि 

बच्चों को बचाने के लिए दी कुर्बानी।

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मध्यप्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में 2 फरवरी 2026 को हुई एक घटना ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। आज के दौर में जहां लोग एक-दूसरे के जान के प्यासे हैं और सिर्फ अपना स्वार्थ देखते हैं, वहां यह दर्दनाक घटना एक प्रेरणादायक, इंसानियत और कर्तव्य की सच्ची मिसाल बन जाती है।  मधुमक्खियों के अचानक हुए भीषण हमले के बीच आंगनवाड़ी रसोइया कंचनबाई मेघवाल ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना लगभग 20 मासूम बच्चों को बचाने का साहसिक कार्य किया। जब परिसर में अफरा-तफरी मची और बच्चे भय से इधर-उधर भागने लगे, तब उन्होंने अद्भुत धैर्य और जिम्मेदारी दिखाते हुए बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस दौरान खुद पर हुए गंभीर हमले के कारण, इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन उनके इस बलिदान ने समाज को यह संदेश दिया कि सच्चा कर्तव्य वही है जिसमें दूसरों की सुरक्षा अपने जीवन से भी बढ़कर हो। कंचनबाई का साहस और मानवता हमेशा याद रखी जाएगी वह सिर्फ एक रसोइया नहीं, बल्कि बच्चों की रक्षक और सच्ची नायिका थीं। ऐसी विरांगना के साहस को मेरा प्रणाम। विनम्र श्रद्धांजलि ॐ शांति 🙏 ✍️ रामजी दौदेरिया...

राम नाम का गुणगान - रामजी दौदेरिया

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    शीर्षक -  राम नाम का गुणगान      कवि -  रामजी दौदेरिया  🙏🙏 जय श्री सीताराम  🙏🙏   अब बनेगा राम मंदिर श्री राम का धाम  होगा राम नाम का गुणगान  रहेगी आन मान शान  राम हिंदूओं अभिमान  सिर्फ भारत में ही नहीं  गूँजेगा दुनिया में हर कहीं   एक ही नारा  एक ही जयकारा  होगा सब का एक ही काम  जय श्री राम जय श्री राम  विश्व गूँज उठेगा राम नाम से  राम नाम गूँज रहा घर घर हिन्दुस्तान से  राम नाम है जग से प्यारा  पवित्र है सबसे न्यारा  राम नाम तू जप ले प्यारे  और जग में लगाओ नारे                                      - रामजी दौदेरिया  रामजी दौदेरिया  कवि लेखक