2026 एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप और भारत का गौरव तेजास्वी शंकर

भारत में खेलों की बात होती है तो सबसे पहले नाम आता है क्रिकेट का। गली-गली में बच्चे बैट लेकर दौड़ते दिख जाएंगे, टीवी चैनलों पर क्रिकेट की चर्चा 24 घंटे चलती रहती है। लेकिन इसी देश की मिट्टी में ऐसे खिलाड़ी भी जन्म लेते हैं, जो बिना शोर-शराबे के, बिना बड़ी सुर्खियों के, भारत का तिरंगा दुनिया के मंच पर लहराकर लौटते हैं।
ऐसी ही एक कहानी है तेजास्वी शंकर की, एक ऐसे एथलीट की, जिन्होंने 2026 में चीन की धरती पर तिरंगा लहरा कर इतिहास रच दिया।

शायद ही किसी को पता हो। चीन की धरती पर फरवरी 2026 में चीन के तियानजिन शहर में आयोजित 2026 एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में एशिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीट एकत्र हुए। ट्रैक और फील्ड के 26 से अधिक इवेंट्स में कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई। इसी प्रतियोगिता में पुरुष हेप्टाथलॉन में तेजास्वी शंकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता।
हेप्टाथलॉन कोई साधारण प्रतियोगिता नहीं है, यह ताकत, फुर्ती, सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा है।
सात अलग-अलग इवेंट्स में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पड़ता है।
तेजास्वी ने न केवल गोल्ड जीता, बल्कि राष्ट्रीय इंडोर रिकॉर्ड भी तोड़ा। यह जीत केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स की बड़ी उपलब्धि थी।

तेजास्वी शंकर जैसे खिलाड़ी सुबह-शाम कड़ी ट्रेनिंग करते हैं सीमित संसाधनों में मेहनत करते हैं, चोटों और चुनौतियों से जूझते हैं, देश का नाम रोशन करते हैं लेकिन अफसोस की बात है कि मिडिया में भी उनकी जीत पर कोई चर्चा नहीं होती। 

यह सच है कि क्रिकेट हमारा लोकप्रिय खेल है, पर सवाल यह है कि अन्य खेलों के नायकों को पहचान कब मिलेगी?
तेजास्वी शंकर की यह स्वर्णिम जीत हमें गर्व से भर देती है। यह केवल एक मेडल नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अगर अवसर और समर्थन मिले, तो भारतीय खिलाड़ी दुनिया जीत सकते हैं।

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