UGC का नियम और वोट बैंक की राजनीति - रामजी दौदेरिया
आरक्षण की मार झेल रहे सवर्ण समाज को अभी तक आरक्षण के कारण बेरोजगारी की समास्या से जूझना पड़ रहा था लेकिन अब UGC के कारण मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना को भी सहना पड़ेगा।
सामान्य वर्ग के छात्रों के पास न तो कोई आरक्षित कोटा है, न अतिरिक्त सहारा। उनके पास योग्यता और मेहनत है। सवर्ण समाज में जन्म लेना ही आज उनका अपराध बन गया।
सामान्य वर्ग का छात्र 70,80,90% अंक लाकर भी मेडिकल, इंजीनियरिंग या सरकारी नौकरी से बाहर हो जाता है, और SC ST वर्ग के छात्र 40,45% अंक लाकर अंदर चला जाता है, तो सवाल सिर्फ़ चयन का नहीं रहता तब सवाल उठता है, क्या इस तरह से भारत विकसित और विश्वगुरु बन पाएगा। भारत को आगे लेकर कौन जाएगा वो लोग जो खुद जाति प्रमाण पत्र का सहारा लेकर चलते हैं। या वो लोग जो अपने दम पर 90% लाने की हिम्मत रखते हैं। सत्ता में बैठे नेताओं को इतनी तो समझ होनी चाहिए कि देश आरक्षण से नहीं योग्य शिक्षण से आगे बढ़ पाएगा तभी विकसित और विश्वगुरु बन पाएगा। नेताओं को समझ है लेकिन वोट बैंक की राजनीति के कारण ही वह अपने दिल दिमाग और आंखों पर गांधारी की तरह पट्टी बांध कर बैठ हुए है। UGC का नियम SC ST OBC समाज का वोट बैंक को देख कर बनाया गया है। जब सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास की बात करने वाली यह सरकार इस तरह के नियम बनाएंगी तो इससे सत्ता की गद्दी पर बैठे राजनेता की नियत और भी स्पष्ट हो जाती है, कि वह सवर्ण समाज का भला नहीं चाहते, तब सवाल उठता है क्या दिल्ली ( केन्द्र ) में बैठी सरकार सवर्ण विरोधी है?
✍️ रामजी दौदेरिया
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