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R R D की डायरी की शायरी 💕

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https://youtube.com/channel/UClhX4nO8Zc-Rrnoi4VKudFg #RRD की डायरी की शायरी  रामजी रामेष्ट दौदेरिया Ramji Rameshth Dauderiya ( R R D ) रामजी दौदेरिया - Ramji Dauderiya  R R Dauderiya you tube channel link 👇 https://youtube.com/channel/UClhX4nO8Zc-Rrnoi4VKudFg

आत्मनिर्भर भारत बनाना है तो आरक्षण पूर्णता खत्म होना चाहिए - रामजी रामेष्ट दौदेरिया

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किसी भी क्षेत्र में आरक्षण देना का मतलब है उस क्षेत्र की बर्बादी और देश की क्षति ! मैं हर क्षेत्र में आरक्षण का विरोध करता हूँ और आरक्षण देने वालो का भी ! कर सको तो आरक्षण पूर्णता बंद करो और योग्य व्यक्ति को उसकी योग्यता के हिसाब से पद दो जिससे देश सही मायने में आत्मनिर्भर बन सके ! एक ओर सरकार आत्मनिर्भरता की बात करती है और दूसरी ओर आरक्षण देती है तो जरा बताइए सरकार में बैठे बुद्धिजीवियों फिर आत्मनिर्भर भारत कैसे बनेगा ?  मेडिकल क्षेत्र में आरक्षण का मतलब बीमारी को नहीं बीमार को ही मार देना है ! शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण का मतलब बच्चों का भविष्य बर्बाद करना, बच्चों का भविष्य बर्बाद देश अपने आप बर्बाद , क्योंकि इतना तो जानते ही होगे आरक्षण देने वाले की बच्चे देश का भविष्य होते है ! इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आरक्षण देना का मतलब घटिया गुणवत्ता ( Quality ) के पुल , सड़क और हादसा से जन की मौत और धन की हानि !  किसी भी क्षेत्र में आरक्षण देना का मतलब देश को क्षति पहुँचा !  आरक्षण वोटबैक हो गया, हर नेता आरक्षण को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, आरक्षण एक ऐसा...

तेरे लिए मैंने कितने नगमे सजाये - रामजी रामेष्ट दौदेरिया

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गीत शीर्षक - तेरे लिए मैंने कितने नंगमे सजाये             गीतकार - रामजी रामेष्ट दौदेरिया  तेरे लिए मैंने कितने नगमे सजाये        गीत बनाये संगीत बनाये      जब तुम से मैंने नैन मिलाये  सपने सजाये दिल में ख्वाब जगाये  तेरे लिए मैंने कितने नगमे सजाये       गीत बनाये संगीत बनाये  तेरी हर अदा का मैंने चित्र बनाया   अपने दिल को तेरा मित्र बनाया  प्यार वाले मैंने उसमें रंग सजाये   मेरा दिल गाये जब तू मुस्काये  तेरे लिए मैंने कितने नगमे सजाये      गीत बनाये संगीत बनाये                                       - रामजी रामेष्ट दौदेरिया  रामजी रामेष्ट दौदेरिया  लेखक / कवि / गीतकार 

हे राम हे कृष्ण भारत में फिर से आ जाओ - रामजी रामेष्ट दौदेरिया

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शीर्षक - हे राम हे कृष्ण भारत में फिर से आ जाओ                 कवि - रामजी रामेष्ट दौदेरिया  हे राम हे कृष्ण भारत में फिर से आ जाओ  राम धर्म कृष्ण धर्म की रक्षा सीखा जाओ !   रावण से भी ज्यादा पापी अब पृथ्वी पर हो गये  कुम्भकर्ण फिर जाग गया, हम कुम्भकर्ण से सो गये  पापियों के पाप का हिसाब कर जाओ  पापियों का आकर सर्वनाश कर जाओ  रामराज्य स्थापना राम भारत में फिर से कर जाओ  गीता के उपदेश कृष्ण भारत में फिर से सुना जाओ  हे राम हे कृष्ण भारत में फिर से आ जाओ  राम धर्म कृष्ण धर्म की रक्षा सीखा जाओ !    पापियों के पाप से आज सृष्टि ताप रही  त्राहिमाम त्राहिमाम कर आज धरती काँप रही   मानव को मानवता मर्यादा राम सीखा जाओ  वचन का पालन करना हम को राम सीखा जाओ  छल से भी पापियों का वध करना हम को कृष्ण सीखा जाओ  महाभारत युद्ध जैसी नीतियाँ हम को कृष्ण सीखा जाओ  हे राम हे कृष्ण भारत में फिर से आ जाओ  राम धर्म कृष्ण धर्म की रक्षा सीखा जाओ ! एक ही नारी संग सुख दुख ज...

ये है बड़े दुख की बात है - रामजी रामेष्ट दौदेरिया

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कविता - ये है बड़े दुख की बात है  कवि - रामजी रामेष्ट दौदेरिया          कृषक और कृषि महान  यही देते मानव को सच्चा जीवन दान  हम जी लेगे बिना व्यापारी बनावटी समान  पर जी नहीं पाएगे बिना किसान बिना धान  परन्तु आज मानव इनसे हैं अनजान       कर रहा प्रकृति का नुकसान  पेड़ अधिक होने की जगह कम हो रहे         तभी तो गर्मी से हम रो रहे  तभी तो प्राणवायु की वजह से हम मौत की नीद सो रहे       क्यों हम अपने कुकर्म के बीज बो रहे  भगवान होने, नहीं होने के सवाल कर रहे  इंसान आज भगवान से बवाल कर रहे  एक दिन आयेगी मृत्यु ये भी भूलते जाते  बस अपने सुख भोग के झूले में झूलते जाते  माया में फँसे होगे, जब आयेगी मृत्यु की बारात !              ये है बड़े दुख की बात !! आज वो इंसान होकर इंसान नहीं है       जो कहते भगवान नहीं है        ये सारी सृष्टि किस ने बनाई      पेड़ किसने ब...

मुरारी बापू जैसे पाखंडियों ढोगियों के बहकावे में ना आए, ऐसे बापू ढोंगी पखांडियों का पूर्ण बहिष्कार करें, भगवा वेशभूषा में हर कोई संत नहीं होता - रामजी रामेष्ट दौदेरिया

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रामजी रामेष्ट दौदेरिया  भगवा बेशभूषा में हर कोई संत नहीं होता  https://www.facebook.com/109474097355378/posts/151578716478249/?app=fbl

अपनी लड़ाई स्वयं लड़ - रामजी रामेष्ट दौदेरिया (मोटिवेशनल कविता)

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शीर्षक - अपनी लड़ाई स्वयं लड़    कवि - रामजी रामेष्ट दौदेरिया  दुनिया भर के लोग सुख में हमारे साथ  पर आया जब दुख सब छोड़ गये हाथ  दुनिया की भीड़ में हम अकेले रह गये    हम तुम्हारे साथ है ये सब कह गये               हम अकेले रह गये   बहुत सारे थे हमारे दोस्त सब स्वार्थी थे  वो भी दिखते नहीं, हम से जो लाभार्थी थे  सुख में सब साथ थे समुद्र की पानी की तरह     दुख में वो नदी के पानी की तरह बह गये                    हम अकेले रह गये           जब धन दौलत थी हमारे पास  तब हजारों थे हमारे खास, रहते थे आस पास               अब कोई नहीं पास  किस से करू आस  किसी की मत करो आस, तेरी अपनी भूख है तेरी प्यास     अपनी लड़ाई स्वयं लड़ बड़े बड़े महापुरुष कह गये           दुनिया की भीड़ में हम अकेले रह गये  हम तुम्हारे स...