विष्णु तिवारी, जिला ललितपुर ग्राम सिलावन उत्तर प्रदेश। बेकसूर विष्णु तिवारी SC/ST ACT के एक झूठे आरोप में 20 साल तक जेल में सजा काटता रहा, और बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे निर्दोष करार दिया। यह मामला भारत का सड़ा हुआ सिस्टम कानून का दुरुपयोग, साक्ष्यहीन गिरफ्तारी, और न्याय व्यवस्था की कमजोरियों पर गंभीर सवाल खड़े करता हैं। मामला वर्ष 2000 का है ललितपुर के सिलावन गाँव की एक महिला ने विष्णु तिवारी पर दुष्कर्म (रेप) और एससी/एसटी Act के तहत झूठा आरोप लगाया। उस महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस की जांच रिपोर्ट पर सेशन कोर्ट ने वर्ष 2003 में विष्णु को रेप और SC/ST एक्ट के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा सुना दी। इसके बाद वह आगरा सेंट्रल जेल में बंद रहा। इस 20 साल लम्बी कानूनी प्रक्रिया के दौरान विष्णु तिवारी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, न मेडिकल रिपोर्ट, न विश्वसनीय गवाह, पुलिस कोई सबूत पेश नहीं कर पाई, जिससे साबित हो गया कि उसे झूठा फंसाया गया। वर्ष 2021 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लगातार सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि मामल...
SC/ST वर्ग क्या वास्तव में सवर्ण वर्ग से कभी पीड़ित था, या अब पीड़ित है, या आगे उन्हें सवर्णों द्बारा पीड़ित किया जा सकता है? सवाल आप पर छोड़ते है? UGC का नया नियम असल में है क्या? पहले समझो UGC क्या है? UGC University Grants Commission विश्वविद्यालय अनुदान आयोग भारत सरकार की एक केंद्रीय संस्था है। इसका काम है देश की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करना। UGC ने जनवरी 2026 में एक नया नियम लागू किया है, जिसका नाम है — “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता संरक्षण नियम, 2026” नियम है कॉलेज और यूनिवर्सिटी में किसी भी छात्र के साथ धर्म, जाति, लिंग, भाषा, क्षेत्र, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव न हो। कानूनी लिखित रूप से “किसी भी छात्र” के लिए है। लेकिन मुख्य मकसद व्यावहारिक और संरचनात्मक रूप से फोकस पिछड़े वर्गों पर ज़्यादा है। सब जानते हैं आज पिछड़ा वर्ग कौन है ? इस नियम की ज़मीनी हक़ीक़त SC, ST के साथ OBC को भी “जातिगत भेदभाव” की श्रेणी में विशेष रूप से शामिल किया गया है। शिक...
26 जनवरी : संविधान, गणतंत्र और आज का भारत —————————————— भारत के इतिहास में 26 जनवरी का दिन स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। यह केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उस संकल्प, संघर्ष और संविधान की विजय का प्रतीक है, जिसने भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाया। 15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ, लेकिन तब देश के पास अपना संविधान नहीं था। लगभग 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन की कठोर मेहनत के बाद संविधान सभा ने संविधान तैयार किया। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ और भारत एक गणराज्य बना। इस दिन से देश में शासन जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा चलने लगा। हर नागरिक को मतदान का अधिकार मिला और कानून की दृष्टि में सभी समान हुए। गणतंत्र का अर्थ है — “जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन।” लेकिन सवाल यह है कि जमीनी स्तर पर इस कथन में कितनी सत्यता है। आज, जब हम 26 जनवरी मनाते हैं, तो प्रश्न उठता है— क्या चुनें हुए जन प्रतिनिधि उस संविधान की आत्मा के साथ खड़े हैं, जिसकी शपथ उन्होंने ली थी? संविधान की आत्मा और वर्तमान यथार्थ भारत का संविधान समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और सामाजिक न...
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