आईना मैंने खरीदा नहीं बाजार से। रामजी दौदेरिया #Ramji_Dauderiya #Poerty
कविता - आईना मैंने खरीदा नहीं बाजार से कवि - रामजी दौदेरिया कभी तो नजर से नजर मिलाओंगी तुम। कभी तो तुम्हारी आंखों में देखेंगे हम।। बस इसी इंतजार से। आईना मैंने खरीदा नहीं बाजार से।...