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Israel America vs Iran war !! Ramji Dauderiya Article

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अपना फेका हुआ जाल में खुद फंसता हुआ नजर आ रहा है अमेरिका। डोनाल्ड ट्रम्प भी सोच रहा होगा मुझे इस तरह से उड़ता हुआ तीर नहीं लेना चाहिए था। हमेशा सुपर पावर सुपर पावर का राग अलापने वाला अमेरिका का जो सुपर पावर वाला भौकाल बना था वह भी आज दुनिया ने देख लिया। इस युद्ब सुपर पावर ( अमेरिका ) की असली औकात सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोचा था पांच से सात दिन का खेल है, ईरान को पूरी तरह नष्ट कर युद्ध जीत जाएंगे, जिन्हें बड़ा घमंड था कि हम अकेले निर्णायक फैसला कर देंगे, वहीं डोनाल्ड ट्रम्प अब अन्य देशों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। कोई देश इतना मूर्ख नहीं है जो बिना वजह उनके साथ युद्ध में कूद जाएं, यहां तक की नाटो देशों ने भी अमेरिका की मदद की गुहार पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अमेरिका ने फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया ब्रिटेन यहां तक कि चीन से भी मदद की गुहार लगाई है। इस युद्ब में कोई आने वाला नहीं है। चीन तो बिल्कुल भी नहीं। चीन ईरान का मित्र है, तथा सुपर पावर वाली दौड़ में वह अमेरिका का दुश्मन है। जितना अमेरिका को युद्ध में नुकसान होगा, चीन का उतना ही फायदा है, चीन तो चाहता ही है कि अ...

भारत का पहला इच्छामृत्यु मामला।

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सोचिए, क्या गुजरी होगी उन मां बाप पर जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया होगा। भारत का पहला इच्छामृत्यु मामला मानवीय संवेदनाओं, कानून और चिकित्सा नैतिकता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गया। हरिश राणा गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे, जो तेरह वर्ष पहले चंडीगढ़ में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे और PG (पेयिंग गेस्ट) मकान में रहते थे। उसी दौरान वे PG की चौथी मंज़िल की बालकनी से गिर गए। इस हादसे में उनके सिर में इतनी गहरी चोट आई कि वे कोमा की अवस्था में चले गए। न बोल पाते थे न ही हिल डुल पाते थे, तब से लेकर कई वर्षों तक वे अचेत अवस्था में रहे और केवल चिकित्सकीय उपकरणों तथा तरल आहार के सहारे उनका जीवन चल रहा था। हरिश के माता-पिता ने अपने बेटे के इलाज और देखभाल में तेरह वर्षों तक अथक प्रयास किया। उन्होंने अपनी आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक खर्च किया और हर संभव उम्मीद के साथ बेटे की सेवा करते रहे। लेकिन समय बीतने के साथ-साथ डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि हरिश के ठीक होने की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है। इस स्थिति में परिवार के सामने एक कठिन और भावनात्म...

माता प्रसाद पुस्तकालय चमारी जालौन

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जहां आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया और मोबाइल के कारण किताबों से दूरी बढ़ती जा रही है, वहीं इसी दौर में पत्रकार सौरभ द्विवेदी ने अपने पैतृक गांव चमारी (जालौन, उत्तर प्रदेश) में एक प्रेरणादायक काम किया है। उन्होंने अपने गांव में एक आधुनिक पुस्तकालय बनवाकर यह साबित किया है कि ज्ञान की असली ताकत अब भी किताबों में ही बसती है। सौरभ द्विवेदी हिंदी पत्रकारिता के एक जाने-माने नाम हैं। सरल भाषा, गहरी समझ और बेबाक शैली के कारण उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में अलग पहचान बनाई। उन्होंने लंबे समय तक India Today Group का लोकप्रिय डिजिटल मंच द लल्लनटॉप का संपादन किया और अपने कार्यक्रमों के माध्यम से राजनीति, समाज और इतिहास जैसे विषयों को आम लोगों तक सरल भाषा में पहुँचाया। लेकिन उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। अपने इसी जुड़ाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने ने अपने गांव चमारी में “माताप्रसाद द्विवेदी पुस्तकालय” का निर्माण कराया। यह पुस्तकालय उनके दादा श्री माताप्रसाद द्विवेदी की स्मृति में बनाया गया है। लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से बने इस भव्य पुस्तकालय का उद्देश्य गांव और...

होली एक परंपरागत त्यौहार।

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होली को हम अक्सर रंग, गुलाल और गुजिया तक सीमित कर देते हैं, लेकिन इस त्योहार की कुछ परतें ऐसी भी हैं, जिन पर कम ही चर्चा होती है। सबसे रोचक बात यह है कि प्राचीन भारत में होली केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक “रीसेट बटन” की तरह थी। पुराने समय में इस दिन लोगों को व्यंग्य, कटाक्ष और खुलकर सच बोलने की छूट होती थी। गाँवों में फाग गाते समय सामाजिक विसंगतियों पर खुलकर तंज कसा जाता था। यह एक तरह से समाज की सफाई का तरीका था—बिना दुश्मनी बढ़ाए सच कह देने की परंपरा। लेकिन फाग की परंपरा अब विलुप्त होती जा रही है। एक और कम जानी गई बात यह है कि पुराने जमाने में होली के रंग औषधीय होते थे। टेसू (पलाश) के फूलों से बनाया गया केसरिया रंग त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता था। हल्दी, चंदन और गुलाब के अर्क का प्रयोग शरीर को संक्रमण से बचाने के लिए किया जाता था। वसंत ऋतु में बदलते मौसम से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए रंगों में प्राकृतिक तत्व मिलाए जाते थे। होली का एक राजनीतिक पक्ष भी रहा है। मध्यकाल में कई शासक इस दिन प्रजा के साथ रंग खेलते थे, ताकि सत्ता और समाज के बीच की दूरी कम हो। यह एक प्रतीकात्...

भारत परमाणु शक्ति की राह में अमेरिका बना था रोड़ा

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इज़राइल आधिकारिक रूप से कहता है “हम ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे।” क्योंकि अगर ईरान परमाणु शक्ति बन गया, तो हमारे अस्तित्व पर खतरा होगा। अमेरिका भी नहीं चाहता कि ईरान परमाणु  शक्ति बने। आज जो देश परमाणु संपन्न नहीं है और वो परमाणु संपन्न होना चाहते हैं अमेरिका उसके लिए सबसे बड़ी अड़चन है अमेरिका नहीं चाहता कोई देश परमाणु संपन्न हो। सत्ययुग में कोई ऋषि-मुनि तपस्या करता था तो इन्द्र खुद व खुद टेंशन में आ जाता था, ऐसा ही कुछ हाल अमेरिका का है इसे पता नहीं क्या टेंशन हो जाती है। अमेरिका ने भारत को भी परमाणु बनाने से रोका था, अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत परमाणु शक्ति बनें इसके लिए उसने हर संभव कोशिश की थी अगर आज के नेता होते तो अमेरिका के सामने घुटने टेक देते उस समय हमारे नेता बहुत मजबूत विजन शक्ति वाले थे, वो कभी अमेरिका के आगे नहीं झुके। उन्होंने अमेरिका को आंखों में आंखें डाल कर जवाब दिया और भारत को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्र बनाया। वो सच्चे राष्ट्रवादी नेता थे, आज के नेताओं की तरह डरपोक नहीं।  भारत ने 18 मई 1974 को पोखरण राजस्थान में प्रधा...

आज का हीरो संजू स्पेशल सैमसन

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स्टेडियम की भीड़ में कभी वह सिर झुकाए बैठा दिखा था। स्कोरबोर्ड उसकी खामोशी बयान कर रहा था और चारों तरफ सवाल तैर रहे थे—क्या अब वक्त निकल गया? छोटी सीरीज़ों में रन नहीं आए तो आलोचनाओं की आँधी चल पड़ी। मोबाइल स्क्रीन से लेकर मैदान की दर्शक दीर्घा तक, हर जगह फैसले सुनाए जा रहे थे। किसी ने कहा टीम से बाहर करो, किसी ने भविष्य पर विराम लगा दिया। लेकिन खेल केवल आंकड़ों से नहीं चलता, वह हिम्मत और इंतज़ार की कहानी भी लिखता है। संजू सैमसन ने भी शोर का जवाब शब्दों से नहीं, तैयारी से दिया। जब बल्ला कुछ मैचों में खामोश रहा, तब उन्होंने खुद को और मजबूत किया। नेट्स में घंटों पसीना बहाया, तकनीक सुधारी, मन को संभाला। क्योंकि असली खिलाड़ी वही है जो गिरकर भी अपने विश्वास को नहीं गिरने देता। फिर आया वह मुकाबला, जहां हर गेंद एक परीक्षा थी। दबाव इतना कि एक चूक सफर रोक सकती थी। लेकिन आज संजू की आंखों में घबराहट नहीं, भरोसा था। उन्होंने संयम को ढाल बनाया और आक्रामकता को हथियार। शॉट दर शॉट, रन दर रन, उन्होंने मैच की दिशा मोड़ दी। टीम लड़खड़ाई जरूर थी, पर उनके धैर्य ने उसे संभाल लिया। भारत सेमीफाइनल...

2026 एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप और भारत का गौरव तेजास्वी शंकर

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भारत में खेलों की बात होती है तो सबसे पहले नाम आता है क्रिकेट का। गली-गली में बच्चे बैट लेकर दौड़ते दिख जाएंगे, टीवी चैनलों पर क्रिकेट की चर्चा 24 घंटे चलती रहती है। लेकिन इसी देश की मिट्टी में ऐसे खिलाड़ी भी जन्म लेते हैं, जो बिना शोर-शराबे के, बिना बड़ी सुर्खियों के, भारत का तिरंगा दुनिया के मंच पर लहराकर लौटते हैं। ऐसी ही एक कहानी है तेजास्वी शंकर की, एक ऐसे एथलीट की, जिन्होंने 2026 में चीन की धरती पर तिरंगा लहरा कर इतिहास रच दिया। शायद ही किसी को पता हो। चीन की धरती पर फरवरी 2026 में चीन के तियानजिन शहर में आयोजित 2026 एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में एशिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीट एकत्र हुए। ट्रैक और फील्ड के 26 से अधिक इवेंट्स में कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई। इसी प्रतियोगिता में पुरुष हेप्टाथलॉन में तेजास्वी शंकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। हेप्टाथलॉन कोई साधारण प्रतियोगिता नहीं है, यह ताकत, फुर्ती, सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा है। सात अलग-अलग इवेंट्स में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पड़ता है। तेजास्वी ने न केवल गोल्ड जीता, बल्कि राष्ट्रीय इंडोर रिकॉर्ड भी तो...

जाति मुक्त सामाज का निर्माण सिर्फ सामाज कर सकता है। रामजी दौदेरिया

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जाति मुक्त सामाज का निर्माण सिर्फ समाज कर सकता है। महाराष्ट्र के सौंदला गांव ने जाति मुक्त सामाजिक बदलाव की मिसाल पेश की है। यहां की ग्रामसभा ने जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने का प्रस्ताव पारित कर स्वयं को “जाति मुक्त” बनाने का संकल्प लिया।  सार्वजनिक स्थानों पर समान अधिकार मंदिर, पानी के स्रोत, सामुदायिक भवन, स्कूल आदि सभी स्थानों पर हर व्यक्ति को बराबर अधिकार देने की प्रतिबद्धता जताई गई। सामाजिक कार्यक्रमों में बदलाव शादी-ब्याह, भोज और धार्मिक आयोजनों में अलग-अलग पंगत या जाति के आधार पर बैठने की परंपरा खत्म कर दी गई है। जाति का सार्वजनिक उल्लेख खत्म किया गया सामाजिक कार्यक्रमों में जातिसूचक पहचान का प्रयोग खत्म किया गया है।  शिक्षित युवाओं ने जागरूकता अभियान चलाए, बैठकों में चर्चा की और विकास को जाति से ऊपर रखने का आग्रह किया। यदि कोई व्यक्ति जातिगत भेदभाव करेगा तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और ग्रामसभा में मुद्दा उठाया जाएगा। सामाज तो चाहता है जात-पात खत्म हो, हर नागरिक को एक सामान अधिकार मिले। क्या ऐसा सच में संभव है, वास्तविक सच्चाई तो यह है कि हमारा सरकारी प्रशासनि...

AI Summit गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद पर राय। रामजी दौदेरिया

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गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा AI Summit विवाद सिर्फ एक प्रवक्ता के द्बारा मिडिया को दी गई गलत जानकारी की चूक भर नहीं है, यह हमारी सरकार और हमारे शिक्षण संस्थान के सिस्टम पर एक जोरदार तमाचा है, जो हमारी सरकार तथा सरकार द्बारा चलाए जा रहे संस्थागत संस्कारों की सच्चाई को उजागर करती है।  इस प्रकरण में जो बात सबसे अधिक चुभी, वह यह है कि विवाद के बाद लीपापोती करना अपनी सफाई में संवाद करना। इन सब से देश को और अधिक कठोरता प्रतीत हुई है। विवाद के बाद सफाई देने से बेहतर था अपनी ग़लती को स्वीकारना, आत्मचिंतन करना और देश को भरोसा दीलाना कि भविष्य में इस तरह के कार्य नहीं होंगे जिससे देश का सिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झुकें। बयानबाजी करना, सुर्खियों में बने रहने की चाहत और पीआर आदि से अधिक प्रभाव हमेशा एक ईमानदार विनम्रता का पड़ता है। दरअसल समस्या सारी उस मानसिकता की है जिससे हम धाराप्रवाह अंग्रेज़ी, आत्मविश्वासी देहभाषा और मंचीय चमक का आकलन करते हैं। अच्छी अंग्रेजी बोलने को ज्ञान, डेवलप या विकसित नहीं कहते है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम अंग्रेजी अच्छी बोले या अंग्...

सोशल मीडिया की ताकत से खड़ा हुआ आंदोलन।

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एक शख्स, सोशल मीडिया, और खड़ा हो गया बड़ा जन आंदोलन। झारखंड, जिला रामगढ़ के बूढ़ाखाप क्षेत्र में स्थित आलोक स्टील प्लांट पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है। यह प्लांट स्टील और स्पंज आयरन उत्पादन से जुड़ा औद्योगिक इकाई है, जो क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास का एक स्रोत माना जाता है।  2004 से यह प्लांट चल रहा है लेकिन  विवाद तब ज्यादा बढ़ गया जब प्लांट के विस्तार की चर्चा शुरू हुई और सोशल मीडिया पर एक स्थानीय व्यक्ति सुरेंद्र महतो का विडियो वायरल हुआ, जिससे स्थानीय आंदोलन का कारण बना और यह मुद्दा अधिक चर्चा में आया है, स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्पादन प्रक्रिया के दौरान धूल, राख और विभिन्न गैसें निकलती हैं। इनमें सूक्ष्म कण, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें शामिल हो सकती हैं।  इससे खेतों पर राख जमती है, हवा में धूल बढ़ती है और सांस लेने में परेशानी महसूस होती है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण का असर खेती, पानी और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लंबे समय तक धूल और प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से अस्थमा, खा...

तमसा नदी का पुनर्जीवन जन आंदोलन। रामजी दौदेरिया

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जहां सरकारी योजनाएं दम तोड़ती हुई नज़र आती है, वहीं आम नागरिक कोई योजना शुरू करते हैं तो उसे अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लेते हैं। ऐसी ही एक योजना शुरू हुई तमसा नदी को साफ करने की और देखते ही देखते यह योजना एक बड़ा जन आंदोलन बन गई।  “ तमसा ” गंगा नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है। जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के मुख्य रूप से आजमगढ़, अम्बेडकर नगर, अयोध्या जिलों से होकर गुजरती है और आगे जाकर गंगा नदी में मिल जाती है। तमसा नदी सिर्फ एक साधारण नदी नहीं है, इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम वनवास पर अयोध्या से निकले थे, तो उन्होंने पहली रात तमसा नदी के किनारे बिताई थी। इसलिए यह नदी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। पहले यह नदी साफ, चौड़ी और जल से भरपूर थी और आसपास के गांवों की जीवनरेखा मानी जाती थी। लेकिन समय के साथ-साथ कई कारणों से नदी की हालत खराब हो गई नदी में सिल्ट (मिट्टी) जमा होने लगी बारिश के बाद मिट्टी जमा होती गई और नदी उथली हो गई। लोगों ने नदी किनारे निर्माण शुरू कर दिया जिससे अतिक्रमण बढ़ा। गांव और कस्बों का कचरा नदी में ज...

आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रूप से शिव क्या है? रामजी दौदेरिया

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शिव को आध्यात्मिक, दार्शनिक, प्रकृति, ऊर्जा, संतुलन और आत्मज्ञान का प्रतीक माना जाता हैं। शिव को संहार और परिवर्तन का देवता कहा जाता है। शिव वह परम चेतना या ब्रह्मांड की ऊर्जा हैं, जो हर जगह मौजूद है। योग और ध्यान में शिव को आदियोगी कहा जाता है, यानी योग के प्रथम गुरु। शिव केवल सृष्टि के विनाशक नहीं, बल्कि पुराने को समाप्त करके नए सृष्टि के कर्ता है। आध्यात्मिक दृष्टि से शिव का अर्थ “शून्य” है, यानी वह अवस्था जहां अहंकार, इच्छा और भ्रम समाप्त हो जाते हैं। जब मन शांत और स्थिर हो जाता है, उसे शिव की अवस्था कहा जाता है। आज भी विज्ञान मानता है कि शिव (शून्य) की अवस्था में ओम् की ध्वनि के साथ ध्यान (Meditation) करने से तनाव कम होता है, दिमाग शांत रहता है और सोचने की शक्ति बढ़ती है। मन पूरी तरह शांत, अहंकार रहित और सत्य तथा ज्ञान से जागरूक हो जाता है। इसी जागरूकता की अवस्था को शिव की तीसरी आंख का प्रतीक माना जाता है। यानि जब व्यक्ति अज्ञान और भ्रम से ऊपर उठता है, तब उसकी “तीसरी आंख” खुली मानी जाती है। विज्ञान कहता है कि पूरा ब्रह्मांड ऊर्जा और कंपन (vibration) से बना है। शिव को उसी अनंत ऊर्...

14 फरवरी काला दिन। रामजी दौदेरिया

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आज का दिन भारत के इतिहास का काला दिन है। लेकिन बहुत ही दुःख की बात है कि 14 फरवरी को लोग वैलेंटाइनडे के रूप में याद रहते है, और शहीदों का बलिदान भूल जाते हैं। 14 फरवरी 2019 भारत के इतिहास का वो काला दिन जिस दिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF जवानों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ। 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए। आज हम उन शहीदों को नमन करते हैं, जिनकी वजह से हम सुरक्षित हैं। उनका साहस, त्याग और देशभक्ति हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी।  इस देश में 14 फरवरी एक काला दिन हो उसी देश के युवा जवानों के बलिदान को भुला कर, वैलेंटाइन डे के रूप में इस दिन का जश्न मनाते हो, उस देश के युवाओं से देशभक्ति राष्ट्रवाद, राष्ट्र सर्वोपरि की भावना की उम्मीद रखना बेईमानी होगी। वीर जवानों को मेरा कोटि-कोटि नमन विनम्र श्रद्धांजलि 🙏 ✍️ रामजी दौदेरिया          लेखक कवि 

राघव चड्ढा राजनीति की नई मिसाल। रामजी दौदेरिया

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आज की वर्तमान राजनीति में जहां नेताओं द्बारा संसद में सिर्फ हंगामा होता है, समय बर्बाद किया जाता है और आम आदमी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भटकाया जाता है। आज जहां नेता अपनी राजनीतिक फायदे के लिए बेवजह के मुद्दे उछालते हैं। वहीं आज एक नेता ऐसा भी है जो आम आदमी की ढाल बन कर खड़ा है, और आम आदमी के मुद्दों को उठाता है। मैं बात कर रहा हूं राघव चड्ढा की। राघव चड्ढा राजनीति से ऊपर उठकर, पार्टीयों से ऊपर उठकर सच्चे देश भक्त की तरह सिर्फ देश के बारे में सोचते है। अगर हर नेता राघव चड्ढा की तरह हो जाएं तो राष्ट्र विकसित और विश्वगुरु भी बन जाएगा, बाकी आज के लॉलीपॉप देने वाले नेताओं से जनता कोई उम्मीद नहीं रखती।  — रामजी दौदेरिया        लेखक कवि 

बच्चों को बचाने के लिए दी कुर्बानी।

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मध्यप्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में 2 फरवरी 2026 को हुई एक घटना ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। आज के दौर में जहां लोग एक-दूसरे के जान के प्यासे हैं और सिर्फ अपना स्वार्थ देखते हैं, वहां यह दर्दनाक घटना एक प्रेरणादायक, इंसानियत और कर्तव्य की सच्ची मिसाल बन जाती है।  मधुमक्खियों के अचानक हुए भीषण हमले के बीच आंगनवाड़ी रसोइया कंचनबाई मेघवाल ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना लगभग 20 मासूम बच्चों को बचाने का साहसिक कार्य किया। जब परिसर में अफरा-तफरी मची और बच्चे भय से इधर-उधर भागने लगे, तब उन्होंने अद्भुत धैर्य और जिम्मेदारी दिखाते हुए बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस दौरान खुद पर हुए गंभीर हमले के कारण, इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन उनके इस बलिदान ने समाज को यह संदेश दिया कि सच्चा कर्तव्य वही है जिसमें दूसरों की सुरक्षा अपने जीवन से भी बढ़कर हो। कंचनबाई का साहस और मानवता हमेशा याद रखी जाएगी वह सिर्फ एक रसोइया नहीं, बल्कि बच्चों की रक्षक और सच्ची नायिका थीं। ऐसी विरांगना के साहस को मेरा प्रणाम। विनम्र श्रद्धांजलि ॐ शांति 🙏 ✍️ रामजी दौदेरिया...

राम नाम का गुणगान - रामजी दौदेरिया

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    शीर्षक -  राम नाम का गुणगान      कवि -  रामजी दौदेरिया  🙏🙏 जय श्री सीताराम  🙏🙏   अब बनेगा राम मंदिर श्री राम का धाम  होगा राम नाम का गुणगान  रहेगी आन मान शान  राम हिंदूओं अभिमान  सिर्फ भारत में ही नहीं  गूँजेगा दुनिया में हर कहीं   एक ही नारा  एक ही जयकारा  होगा सब का एक ही काम  जय श्री राम जय श्री राम  विश्व गूँज उठेगा राम नाम से  राम नाम गूँज रहा घर घर हिन्दुस्तान से  राम नाम है जग से प्यारा  पवित्र है सबसे न्यारा  राम नाम तू जप ले प्यारे  और जग में लगाओ नारे                                      - रामजी दौदेरिया  रामजी दौदेरिया  कवि लेखक 

बढ़ता कोरोना, जमात की भागीदारी - रामजी दौदेरिया

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रामजी दौदेरिया  शीर्षक - बढ़ता कोरोना और जमात की भागीदारी   कवि  -  रामजी दौदेरिया   अब तक मौलाना साद क्यों पकड़ा नहीं गया?      कानून की जंजीरों क्यों जकड़ा नहीं गया?  मरकज़ से फैलाया कोरोना जिस ने सारे देश में।      छुपा बैठा किसी कोने में किसी वेश में।     प्रशासन देश के गद्दारों को दे सख़्त संदेश।  पकड़ मौलाना को जल्द , भाग ना जाए वो विदेश।  इस ने और इस के जमातियों ने।     मरकज़ की इन जातियों ने।     हम देश के गद्दार हैं खुद बताया।  थूक - थूक कर कोरोना इन्होंने फैलाया।     देश में बढ़ा दिए कोरोना मरीज़।  बो रहे देश में ये नफ़रत के बीज।  अगर सारे जमाती जल्द पकड़े ना पाएंगे। कोरोना के मरीज़ देश में और बढ़ जाएंगे।  अब तक तो लॉकडाउन भी खुल जाता।    एक-एक जमाती अगर पकड़ जाता।  कुछ नेता क्यों जमातियों पर बोल नहीं रहे?   लगता है उन के हितैषी हैं, राज़ खोल नहीं रहे?     जमातियों को खुद आ कर जाँच करवानी चाहिए...

ये नया भारत है - रामजी दौदेरिया

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शीर्षक - ये नया भारत है  कवि - रामजी दौदेरिया       चीन की जो चालाकी मक्कारी है।       उस के नस - नस में भरी गद्दारी है।            सब से उसकी स्वार्थ की यारी है।  हाथ मिलाकर धोखेबाज़ी करता हर बारी है।       खत्म अब समझो चीन की कहानी सारी है।  निकल जाएगी उसकी की सारी होशियारी है।  १९६२ मत समझ लेना, ये २०२० की तैयारी है।  हमारा एक जवान चीन के एक हज़ार पर भारी है।                                           - रामजी दौदेरिया  रामजी दौदेरिया 

@एपस्टीनफाइल्स, जेफरी एपस्टीन का जाल – रामजी दौदेरिया

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इंसानियत को शर्मसार करने वाला बहुत ही घिनौना मामला आज हर जुबान पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जब इंसानियत हैवानियत बन जाती है, जब पाप चरम की सीमा लांघ जाता है तब सामने आते हैं चमक-दमक में छिपे हुए घिनौने चेहरे। #एपस्टीनफाइल्स। अमेरिकी बिजनेसमैन जेफरी एपस्टीन का बिछाया हुआ वो काला जाल है जिसकी हकीकत एक-एक करके बाहर आ रही हैं, तस्वीरें विडियो, देखकर लग रहा अमीर होने पे आदमी घटिया ही हो जाता है। एपस्टीन फाइल्स दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा यौन अपराध सेक्स रैकेट है। दुनिया में सबसे बड़ा तस्करी का खेल यहां चलता था। 11 साल से लेकर 14 साल तक की बच्चियों के साथ दुष्कर्म ( रेप ) होता था। हैवानों का मन इतने से भी नहीं भरता था, कलयुगी राक्षस उन बच्चियों के अंग काट कर खाते थे। बच्चियों को उनके सामने खाने की तरह परोसा जाता था... एपस्टीन फाइल्स के बारे में जितना पढ़ोगे उतना ही कलेजा फट जाएगा। यह सिर्फ उस आयलैंड  ( द्वीप ) की हकीकत नहीं है बल्कि दुनिया के उन पावरफुल लोगों की हकीकत है, जिन्हें हम महान मानते थे या मानते हैं। हम उन से उम्मीद लगाते है कि वह दुनिया बदलेंगे। एपस्टीन फाइल्स सिर्फ एक केस ...

एक तरफा घटिया कानून का दुरुपयोग – रामजी दौदेरिया

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विष्णु तिवारी, जिला ललितपुर ग्राम सिलावन उत्तर प्रदेश। बेकसूर विष्णु तिवारी SC/ST ACT के एक झूठे आरोप में 20 साल तक जेल में सजा काटता रहा, और बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे निर्दोष करार दिया।  यह मामला भारत का सड़ा हुआ सिस्टम कानून का दुरुपयोग, साक्ष्यहीन गिरफ्तारी, और न्याय व्यवस्था की कमजोरियों पर गंभीर सवाल खड़े करता हैं।  मामला वर्ष 2000 का है ललितपुर के सिलावन गाँव की एक महिला ने विष्णु तिवारी पर दुष्कर्म (रेप) और एससी/एसटी Act के तहत झूठा आरोप लगाया।  उस महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस की जांच रिपोर्ट पर सेशन कोर्ट ने वर्ष 2003 में विष्णु को रेप और SC/ST एक्ट के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा सुना दी। इसके बाद वह आगरा सेंट्रल जेल में बंद रहा।  इस 20 साल लम्बी कानूनी प्रक्रिया के दौरान विष्णु तिवारी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, न मेडिकल रिपोर्ट, न विश्वसनीय गवाह, पुलिस कोई सबूत पेश नहीं कर पाई, जिससे साबित हो गया कि उसे झूठा फंसाया गया। वर्ष 2021 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लगातार सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि मामल...